
एक नंदी और एक गाय की अनोखी प्रेम कहानी
अंतत: लक्ष्मी को वापस ले आया मंजा मलाई
उप मुख्यमंत्री के पुत्र ने कराया दोनों का मिलन
मदुराई (तमिलनाडू)
यह एक ऐसी कहानी है जो आपको पशुओं के बारे में एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर देगी। हिंदू समाज में गोवंश को एक विशेष दर्जा प्राप्त है। इस प्रेम कहानी को पढ़ने के बाद आपको पता चलेगा कि गाय और नंदी कितने संवेदनशील होते हैं।

आर्थिक परेशानी से घिरे मदुरई जिले के पलामेडु गांव के किसान टी मणिकन्दन ने अपनी गाय लक्ष्मी को ₹20000 में एक डेयरी फार्म को बेच दिया। लक्ष्मी 4 साल से मणिकंदन के पास थी। पास ही के मंदिर के नंदी मंजा मलाई और लक्ष्मी के बीच बचपन से मित्रता थी। वे दोनों साथ साथ खेलते और घूमते थे। जब डेरी फॉर्म वाले एक वाहन में लक्ष्मी को लेने आए तो मंजा मलाई भागता हुआ उनके बीच आ गया।
उसे समझ में आ कि लक्ष्मी को ले जाया जा रहा है। वो लक्ष्मी को नहीं ले जाने देना चाहता था। जब लक्ष्मी को वाहन में चढ़ा दिया गया तो वह वाहन के आसपास घूमने लगा। जैसे ही वाहन चलने को हुआ मंजा मलाई ने उसके पीछे दौड़ लगा दी। डेढ़ किलोमीटर तक लक्ष्मी की वाहन के पीछे दौड़ा। अंततः डेयरी फार्म का वाहन ने लक्ष्मी को डेयरी फार्म में छोड़ दिया।
वीडियो हुआ वायरल तो मिली मदद
किसी ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया। जब यह वीडियो वायरल हुआ तो कई लोगों ने मणिकंदन से संपर्क किया और उसे पैसे देने का प्रस्ताव दिया और कहा कि वह लक्ष्मी को वापस ले आए। डेयरी फार्म का मालिक को लालच आ गया। वह 20000 में खरीदी हुई लक्ष्मी को वापस देने के ₹40000 की मांग करने लगा।

इस घटना का पता तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के बेटे ओ पी जयप्रदीप को चला। वह फार्म हाउस से लक्ष्मी को लेकर आए और उसे उस मंदिर को सौंप दिया जहां पर मंजा मलाई रहता है। इस तरह से लक्ष्मी और मंजा मलाई का एक बार फिर मिलन हो गया। इस कहानी से पता चलता है कि गोवंश कितने संवेदनशील होते हैं। वे मनुष्य की तरह प्रेम और पीड़ा को अनुभव करते हैं। यह बात उन लोगों के सोचने के लिए है जो इन्हें सब्जी या मशरूम समझकर खा जाते हैं।
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