औरंगाबाद का नाम होगा संभाजी नगर, शिवसेना ने की घोषणा

औरंगाबाद का नाम होगा संभाजी नगर, शिवसेना ने की घोषणा

कांग्रेस के विरोध पर कहा, उन्हें समझना चाहिए कि मुगल धर्मनिरपेक्ष नहीं थे

मुंबई.

शिवसेना शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में इस बात की घोषणा की है कि वर्तमान महाराष्ट्र सरकार जिसके मुखिया शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे हैं, औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर करने जा रही है। शिवसेना महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ सत्ता में है ऐसे में यह अपेक्षा नहीं की जा रही थी कि शिवसेना औरंगाबाद का नाम बदलने की अपनी वर्षों पुरानी मांग को इस सरकार में पूरा करेगी।

उधर आशा अनुरूप कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने शिवसेना की घोषणा की आलोचना की है तो वहीं शिवसेना का कहना है कि औरंगाबाद के मुसलमान भी नाम बदले जाने के पक्ष में हैं। वह इस मामले में कोई विवाद नहीं चाहते। खास बात यह है कि औरंगाबाद का सांसद ओवैसी की पार्टी का है।

इस संबंध में शिवसेना के मुखपत्र सामना में एक संपादकीय लिखा गया है । इसमें कहा गया है कि शिवसेना के नेतृत्व में चल रही महाराष्ट्र की महा विकास आघाडी सरकार जल्द ही औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर कर देगी। इस मामले में कांग्रेस की आपत्तियों के मामले में शिवसेना ने कहा कि यह सही है कि यह मुद्दा वर्तमान सरकार की कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का हिस्सा नहीं है लेकिन नाम परिवर्तन जैसे छोटे मुद्दे को इसमें जोड़ना मूर्खता होती। साथ ही शिवसेना ने यह भी कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही औरंगाबाद का नाम बदले जाने के विरोध में रही है।

औरंगजेब और मुगल सेकुलर नहीं

सामना के संपादकीय में औरंगजेब के बारे में लिखा गया है कि वह सेक्युलर शासक नहीं था। लिखा गया है कि औरंगजेब कभी भी महाराष्ट्र के धर्म और अभिमान का प्रतीक नहीं रहा। साथ ही लेख में यह भी कहा गया है कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि मुगल शासक धर्मनिरपेक्ष नहीं थे। शिवसेना ने कहा कि जिस तरह से सर्वसम्मति से राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हुआ है उसी तरह से औरंगाबाद का नाम भी बदलकर संभाजीनगर कर दिया जाएगा।

भाजपा पर सवाल

इस आलेख में भारतीय जनता पार्टी पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि जब पार्टी दिल्ली में औरंगजेब मार्ग का नाम बदल सकती है इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किया जा सकता है तो फिर देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने उसी समय औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर क्यों नहीं किया? सामना में कहा गया है कि भाजपा की रुचि केवल महाराष्ट्र की सरकार को अस्थिर करने में है। जबकि इस मामले में शिवसेना का रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है।

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