मुसलमानों के फिर से हिन्दू बन जाने के डर से शुरू हुई थी तबलीगी जमात

मुसलमानों के फिर से हिन्दू बन जाने के डर से शुरू हुई थी तबलीगी जमात

आर्य समाज के बढ़ते प्रभाव का डर था मौलानाओ में ,एक गोत्र में शादी भी नहीं करते थे मेवाती मुसलमान

तबलीगी जमात की स्थापना 1926 में हरियाणा के मेवात में हुई थी। इसके पीछे के कारण बहुत रोचक बताए जाते हैं। इनमें से एक कारण धर्मांतरित कर मुस्लिम बनाए हए मेवाती मुसलमानों का पुन: हिन्दू बन जाने का डर भी था। मेवाती मुसलमानों की पृष्ठभूमि हिन्दू थी। इसके चलते इन लोगों के यहां विवाह में फेरे होते थे तथा हिन्दुओं की तरह गोत्र प्रणाली भी प्रचलित थी। ये लोग मुसलमानों की तरह रिश्तेदारी में शादी करना तो दूर एक गोत्र में भी विवाह नहीं करते थे। इतना ही नहीं ये मेवाती मुसलमान बड़े पैमाने पर होली जैसे हिन्दू त्यौहार भी मनाते थे।

उस समय हरियाणा में आर्य समाज का अच्छा खासा प्रभाव रहा है। उस समय आर्य समाज का शुद्धि आंदोलन भी जोरों पर था। इसके चलते कुछ मुसलमानों को डर लगने लगा था कि कहीं आर्य समाज के प्रभाव में मुसलमान बने मेवाती कहीं फिर से हिन्दू न बन जाएं। इसे देखते हुए पुराने इस्लाम की ओर लौटने के आह्वान के साथ जमात की शुरुआत हुई थी। पुराने इस्लाम का मतलब है के पैगंबर के समय का इस्लाम।

इसके बारे में फ्रांस की इंटेलीजेंस और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर अध्ययन करने वाली संस्था फ्रेंच सेंटर फॉर रिसर्च ऑन इंटेलीजेंस, जिसे सीएफ2आऱ के नाम से भी जाना जाता है, ने भी तबलीगी जमात के आतंकी रिश्तों पर एक शोध प्रकाशित किया था। यह शोध पाकिस्तानी विशेषज्ञ डॉ. फरहान जाहीद ने लिखा है। इसमें उन्होंने एक और रोचक तथ्य बताया है जो कि देवबंद और तबलीगी दोनों के विकास पर और उद्देश्य पर प्रकाश डालता है।

इसमें कहा गया है कि 1857 की क्रांति के असफल होने के बाद इसमें भाग लेने वाले कुछ मुस्लिमों विद्वानों को लगने लगा था कि अब अंग्रेजों को हराना आसान नहीं है। इसके चलते इन लोगों ने अरब के वहाबी इस्लाम को भारत में स्थापित करने के तैयारी की। इसके लिए इन मौलानाओं ने 1867 में देवबंद में मदरसे की स्थापना की थी, जिसे हम आज दारूल उलूम के नाम से जानते हैं।  वास्तव में देवबंदी आंदोलन भारत में वहाबी इस्लाम को स्थापित करने का आंदोलन था जमात इसी से निकला हुआ एक टुकड़ा है। बाद में देवबंद से अलग होकर मौलाना मोहम्मग इलियास कान्धलवी ने इसाई मिशनरी की तर्ज पर वहाबी इस्लाम का प्रचार करने के लिए तबलीगी जमात की स्थापना हरियाणा के मेवाती से की।

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